पुलिस के अनुसार, आरोपियों में एक सब-इंस्पेक्टर और दो कॉन्स्टेबल शामिल हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने एक नाबालिग छात्रा का नाम लेकर प्रिंसिपल को झूठे केस में फंसाने की धमकी दी और मामले को दबाने के बदले मोटी रकम मांगी।
बताया जा रहा है कि आरोपी पुलिसकर्मियों ने पहले प्रिंसिपल पर दबाव बनाया और फिर गिरफ्तारी व बदनामी का डर दिखाया। इस दौरान प्रिंसिपल काफी मानसिक तनाव में आ गए और अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए आरोपियों को करीब 7 लाख रुपये दे दिए।
मामले का खुलासा तब हुआ जब पूरी घटना की जानकारी पीड़ित पक्ष ने उच्च अधिकारियों को दी। शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की गई, जिसमें प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए।
इसके बाद तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ उगाही, आपराधिक साजिश और धमकी देने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
यह घटना एक बार फिर कानून के रखवालों की भूमिका पर सवाल खड़े करती है और पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता की जरूरत को उजागर करती है।

