हाई कोर्ट का फैसला और नोटिस
जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की पीठ ने सीबीआई की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और मामले में अन्य 21 आरोपियों को नोटिस जारी किया। इन सभी से केंद्रीय जांच एजेंसी की याचिका पर जवाब मांगा गया है। इस नोटिस ने आप नेताओं के खेमे में हलचल बढ़ा दी है, जो हाल ही में निचली अदालत के फैसले को अपनी 'ईमानदारी की बड़ी जीत' बता रहे थे।
निचली अदालत की टिप्पणियों पर रोक
एक बड़ी कार्रवाई करते हुए, हाई कोर्ट ने राउज एवेन्यू कोर्ट की उन सख्त टिप्पणियों पर अंतरिम रोक लगा दी, जो सीबीआई के जांच अधिकारियों के खिलाफ की गई थीं। निचली अदालत ने सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए थे, जिसे अब हाई कोर्ट ने फिलहाल टाल दिया है।
इसके अलावा, हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जब तक सीबीआई की इस याचिका पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक निचली अदालत प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की कार्यवाही को आगे न बढ़ाए।
सीबीआई की दलील
सीबीआई ने हाई कोर्ट में तर्क दिया कि निचली अदालत का फैसला 'कानूनी रूप से गलत' था। जांच एजेंसी का दावा है कि उनके पास आबकारी नीति बनाने और उसे लागू करने में साजिश, रिश्वतखोरी और 'साउथ ग्रुप' से अवैध लेनदेन को साबित करने के लिए पर्याप्त गवाह और दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि निचली अदालत ने साक्ष्यों की सही से समीक्षा नहीं की।
पृष्ठभूमि: निचली अदालत ने किया था बरी
बता दें कि 27 फरवरी 2026 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और बीआरएस नेता के. कविता सहित सभी 23 आरोपियों को इस मामले में यह कहते हुए बरी (Discharge) कर दिया था कि सीबीआई के पास आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत नहीं हैं। विशेष न्यायाधीश ने तब इस मामले को केवल 'अनुमानों और अटकलों' पर आधारित बताया था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे का रास्ता
निचली अदालत के फैसले के बाद, आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों पर विपक्ष को निशाना बनाने के लिए 'फर्जी मामले' गढ़ने का आरोप लगाया था। अब, हाई कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद, राजनीतिक रस्साकशी तेज होने की संभावना है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले की अगली सुनवाई, जो 16 मार्च 2026 को होने वाली है, यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि सीबीआई के पास बरी करने के आदेश को पलटने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार हैं या नहीं।
फिलहाल, अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के लिए कानूनी जंग जारी है।

