कलाम लैब्स: शिक्षा से अंतरिक्ष तक का सफर
लखनऊ स्थित इस स्टार्टअप ने शुरुआत एक एड-टेक (Ed-tech) प्लेटफॉर्म के रूप में की थी, लेकिन हाल ही में इसने अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव किया है। अब यह कंपनी हाई-एल्टीट्यूड ड्रोन्स (High-Altitude Drones) और स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही है।
क्यों खास है यह ड्रोन टेक्नोलॉजी?
कलाम लैब्स ऐसे उन्नत मानवरहित विमान (UAVs) तैयार कर रहा है जो स्ट्रैटोस्फीयर (धरती से काफी ऊंचाई पर) उड़ान भरने में सक्षम हैं। इन ड्रोन्स की सबसे बड़ी खासियत इनका 'लो थर्मल सिग्नेचर' है, जिस वजह से इन्हें रडार पर पकड़ना बेहद मुश्किल होता है। इन्हें 'मिनी फाइटर जेट्स' की तरह डिजाइन किया गया है, जो कम लागत में सटीक निगरानी करने में माहिर हैं।
दीपिंदर गोयल का बदलता फोकस
पिछले कुछ महीनों में दीपिंदर गोयल ने केवल फूड डिलीवरी तक ही सीमित न रहकर, भविष्य की तकनीकों में काफी रुचि दिखाई है:
- उनका नया वेंचर 'टेम्पल' (Temple) वियरेबल हेल्थ डिवाइसेस पर काम कर रहा है।
- उन्होंने एलएटी एयरोस्पेस (LAT Aerospace) के जरिए एविएशन और डिफेंस रोबोटिक्स में भी अपनी पकड़ मजबूत की है।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि दीपिंदर गोयल का 'कलाम लैब्स' में निवेश करना यह दर्शाता है कि भारत के बड़े उद्यमी अब डीप-टेक और डिफेंस-टेक को भविष्य का सबसे बड़ा मार्केट मान रहे हैं।

