विदेशी फूलों से महका 'माँ' का द्वार
माता के भवन की सुंदरता इस बार देखते ही बन रही है। सजावट के लिए विशेष रूप से विदेशों से मंगाए गए ताजे फूलों का इस्तेमाल किया गया है। रात के समय पूरी पहाड़ी रंग-बिरंगी दूधिया रोशनी (LED Lighting) से जगमगा रही है, जो भक्तों के लिए एक अलौकिक अनुभव होने वाला है।
सुरक्षा का 'अभय कवच': परिंदा भी न मार सकेगा पर
श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सचिन कुमार वैश्य के नेतृत्व में इस वर्ष सुरक्षा व्यवस्था को एक नए मुकाम पर पहुँचाया गया है। संभावित भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं:
- RFID कार्ड अनिवार्य: अब श्रद्धा की राह पर 'डिजिटल पहचान' का पहरा होगा। बिना RFID कार्ड के किसी भी यात्री को बाणगंगा से आगे जाने की अनुमति नहीं होगी। यह कार्ड भीड़ नियंत्रण और आपात स्थिति में यात्री की लोकेशन ट्रैक करने में मददगार साबित होगा।
- तीसरी आँख का पहरा: पूरे यात्रा मार्ग पर हाईटेक सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया गया है, जिसकी मॉनिटरिंग 24/7 कंट्रोल रूम से की जा रही है।
- क्विक रिस्पॉन्स टीमें (QRT): किसी भी संदिग्ध गतिविधि या आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षाबलों की विशेष टीमें चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद रहेंगी।
सघन चेकिंग और वेरिफिकेशन अभियान
कटरा और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। सेना, खुफिया विभाग और स्थानीय पुलिस के साझा तालमेल से होटलों और धर्मशालाओं की नियमित जांच की जा रही है। यही नहीं, स्थानीय मजदूरों, प्रवासियों और टट्टू चलाने वालों का नए सिरे से पुलिस वेरिफिकेशन किया गया है ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो।
भक्तों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम
सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि भक्तों की सुलभ यात्रा के लिए भी श्राइन बोर्ड ने कमर कसी है:
- गर्मी और आगजनी से बचाव: पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था और यात्रा मार्ग का फायर ऑडिट पूरा कर लिया गया है।
- दिव्यांगों और बुजुर्गों को राहत: बैटरी कारों के सुचारू संचालन के साथ-साथ विशेष पूजा और आरती के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं।
प्रशासन का अनुमान है कि इस बार भक्तों की संख्या पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया गया है कि हर भक्त माता के दर्शन शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से कर सके।

