रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव भारत के लिए सबसे बड़ा जोखिम बनकर उभर रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
इसके अलावा, वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में पूंजी निकाली है। इससे रुपये पर दबाव देखने को मिला है, जो आर्थिक स्थिरता के लिए चिंता का विषय है।
महंगाई को लेकर भी रिपोर्ट में सतर्कता जताई गई है। अनुमान है कि आने वाले समय में खुदरा महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है, जबकि चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) भी बढ़ने की आशंका है। साथ ही, सरकार का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) भी दबाव में रह सकता है।
हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद World Bank ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बताया है। मजबूत बैंकिंग प्रणाली और उच्च विदेशी मुद्रा भंडार भारत की अर्थव्यवस्था को सहारा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
फिलहाल, साफ है कि भारत की आर्थिक रफ्तार बरकरार है, लेकिन वैश्विक हालात आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

