'मूल्यों और नैतिकता में अंतर' के कारण छोड़ना पड़ा बोर्ड
सीएनबीसी टीवी-18 के साथ बातचीत में पूर्व नौकरशाह अतनु चक्रवर्ती ने बेहद बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि मैनेजमेंट के साथ व्यक्तिगत मनमुटाव की खबरें महज बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई हैं। उनके हटने की असली वजह बैंक के कार्य करने के तरीके में मूल्यों और नैतिकता का अभाव होना था।
चक्रवर्ती ने कहा:
"मुझे इस बात का गहरा खेद है कि बैंक प्रबंधन द्वारा एटी-1 बॉन्ड की गलत जानकारी देकर की गई बिक्री को सिर्फ एक 'तकनीकी मुद्दा' मान लिया गया। दुख की बात यह है कि इस पर कार्रवाई होने में आठ साल लग गए, जबकि दुबई और भारत के नियामकों ने इस मुद्दे को बहुत पहले ही उठा दिया था।"
साख पर लगा बट्टा: जनता के भरोसे से न हो खिलवाड़
चक्रवर्ती ने जोर देकर कहा कि बैंक जैसी संस्थाओं में इस तरह की गतिविधियां साख को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने कुछ बेहद अहम बिंदु सामने रखे:
- साख का नुकसान: आम जनता बैंक पर भरोसा करके सलाह लेने आती है। ऐसे में गलत वित्तीय उत्पादों को बेचना (Misselling) नैतिकता के खिलाफ है।
- नियामकों की कार्रवाई: बता दें कि पिछले साल सितंबर में दुबई के अधिकारियों ने एचडीएफसी बैंक की दुबई शाखा पर नए ग्राहक जोड़ने पर रोक लगा दी थी। यह रोक क्रेडिट सुइस के एटी-1 बॉन्ड की गलत बिक्री के चलते जुर्माने के रूप में लगाई गई थी।
- मैनेजमेंट की जिम्मेदारी: उन्होंने कहा कि बैंक के इंसेंटिव स्ट्रक्चर और मैनेजमेंट को यह हर हाल में सुनिश्चित करना चाहिए कि वे जमाकर्ताओं, शेयरधारकों और आम जनता के हितों के लिए काम कर रहे हैं।
बैंक के 'कमतर प्रदर्शन' पर भी उठाए सवाल
अपने इस्तीफे के पीछे चक्रवर्ती ने बैंक के कमजोर वित्तीय और बाजार प्रदर्शन को भी एक बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र निदेशक होने के नाते बैंक के बेहतर प्रदर्शन को सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी थी। उन्होंने कमजोर प्रदर्शन के तहत इन बातों का जिक्र किया:
- बैंक के शेयरों की कीमतों का लगातार कम रहना।
- सस्ते चालू और बचत खाता (CASA) जमा की हिस्सेदारी में कमी आना।
- उच्च लागत-आय अनुपात (High Cost-to-Income Ratio) का होना।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एचडीएफसी लिमिटेड का बैंक में जो विलय हुआ था, उसका उनके इस फैसले से कोई लेना-देना नहीं है।
सेबी की सलाह और गोपनीयता का हवाला
हाल ही में पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने स्वतंत्र निदेशकों को पूरी जिम्मेदारी से काम करने की हिदायत दी थी। इस पर चक्रवर्ती ने कहा कि उन्होंने अपने पत्र में मूल्यों और नैतिकता पर 'असंगति' (Inconsistency) शब्द का इस्तेमाल किया है। हालांकि, गोपनीयता के नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या उन्होंने इन मुद्दों को कभी बोर्ड स्तर पर उठाया था या इसके बारे में वित्तीय नियामकों को सूचित किया था।

