सस्ता डेटा, बेमिसाल खपत
रिपोर्ट के मुताबिक, 2014-15 में जो डेटा 269 रुपये प्रति GB की दर से मिलता था, वह अब घटकर मात्र 7.9 रुपये प्रति GB रह गया है। इस किफायती बदलाव का सीधा असर इंटरनेट के उपयोग पर पड़ा है:
- औसत मासिक खपत: 61.66 MB से बढ़कर अब 25.25 GB प्रति सब्सक्राइबर हो गई है।
- ब्रॉडबैंड विस्तार: ग्राहकों की संख्या 25 करोड़ (2014) से बढ़कर 103 करोड़ (2025) के पार पहुँच गई है।
बुनियादी ढांचे में रिकॉर्ड मजबूती
प्रधानमंत्री के 'टेक्नोलॉजी फॉर ऑल' दृष्टिकोण को सफल बनाने के लिए सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष जोर दिया है:
- ऑप्टिकल फाइबर: नेटवर्क का जाल 358 किमी से बढ़कर अब 6.92 लाख किमी से अधिक हो चुका है।
- BTS स्टेशन: मोबाइल टावरों (BTS) की संख्या 7.9 लाख से बढ़कर 29.5 लाख हो गई है।
- ग्रामीण कनेक्टिविटी: देश के 6.35 लाख गांव अब 2G, 3G और 4G नेटवर्क से लैस हैं, जो लगभग शत-प्रतिशत कवरेज को दर्शाता है।
- इंटरनेट की पहुंच का विस्तार।
- डेटा को बेहद किफायती बनाना।
- मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)।
- जन-जन तक डिजिटल साक्षरता पहुँचाना।
"इंटरनेट का सस्ता होना केवल एक आर्थिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि इसने डिजिटल साक्षरता और समावेशिता को जन्म दिया है, जिससे गाँव और शहर की दूरी कम हुई है।" > — आईटी मंत्रालय का आधिकारिक वक्तव्य
डिजिटल इंडिया के चार स्तंभ
मंत्रालय के अनुसार, इस सफलता के पीछे चार मुख्य रणनीतियों ने काम किया है:
इन प्रयासों ने न केवल आम नागरिक की जेब का बोझ कम किया है, बल्कि ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल बैंकिंग को घर-घर तक पहुँचाकर देश की अर्थव्यवस्था को नई गति दी है।

