जोधपुर जेल से रिहा हुए सोनम वांगचुक: लद्दाख आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने रद्द की हिरासत

The Bharat Day

जोधपुर/नई दिल्ली: लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार को जोधपुर केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका/NSA) के तहत उनकी हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का बड़ा फैसला लिया है।

प्रमुख बिंदु: रिहाई और कार्रवाई

  • रिहाई का समय: वांगचुक को शनिवार दोपहर करीब 1:30 बजे जेल से रिहा किया गया। उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो औपचारिकताएं पूरी करने के लिए जोधपुर में मौजूद थीं।
  • हिरासत की वजह: सितंबर 2025 में लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद, 'जनव्यवस्था' बनाए रखने के लिए लेह जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर उन्हें हिरासत में लिया गया था।
  • समय सीमा: वांगचुक अपनी निर्धारित हिरासत अवधि का लगभग आधा समय पहले ही जेल में बिता चुके हैं।


क्यों हुई थी गिरफ्तारी?

​सितंबर 2025 में लद्दाख की मांगों को लेकर लेह में हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए थे, जिसमें 22 पुलिसकर्मियों सहित लगभग 45 लोग घायल हुए थे। इसी घटना के दो दिन बाद, 26 सितंबर 2025 को वांगचुक को हिरासत में लेकर जोधपुर जेल स्थानांतरित कर दिया गया था।


सरकार का रुख और समाधान की कोशिश

​केंद्र सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार:

​"सरकार लद्दाख के विभिन्न सामुदायिक नेताओं और हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है। हमारा उद्देश्य क्षेत्र के लोगों की चिंताओं का स्थायी समाधान निकालना है।"


​विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी रिहाई लद्दाख में शांति बहाली और सरकार के साथ बातचीत की प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकती है|


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