अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि नई तकनीकों का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। AI का उपयोग केवल बड़े उद्योगों या कुछ लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका फायदा छात्रों, किसानों, छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों को भी मिलना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि AI का विकास मानव-केंद्रित होना चाहिए। इसका उद्देश्य लोगों के जीवन को आसान बनाना, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना तथा रोजगार और नवाचार के नए अवसर पैदा करना होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने भारत की डिजिटल उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि देश ने डिजिटल भुगतान, डिजिटल पहचान और ऑनलाइन सेवाओं के क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है। इन सफलताओं के आधार पर भारत अब AI के क्षेत्र में भी वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी, तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम और मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचा है। यही कारण है कि भारत आने वाले वर्षों में AI और नई तकनीकों का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
सम्मेलन में भारत ने कई AI आधारित नवाचारों और स्टार्टअप्स का प्रदर्शन भी किया। इससे दुनिया के सामने भारत की तकनीकी क्षमता और नवाचार शक्ति को दिखाने का अवसर मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि "AI for All" की सोच भारत को ऐसी तकनीक विकसित करने में मदद करेगी जो केवल आर्थिक विकास ही नहीं, बल्कि सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

